भारी विरोध के बीच ACP Vivek Bhagat के प्रमोशन पर रोक, महिला पत्रकार से की थी बदतमीजी
दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत (Vivek Bhagat) के प्रमोशन को फिलहाल रोक दिया है। महिला पत्रकार से बदतमीजी करने के मामले में क्लीन चिट मिल जाने के बाद ही विवेक भगत के प्रमोशन पर फैसला लिया जाएगा। एसीपी विवेक भगत को प्रमोशन के तौर पर एडिशनल डीसीपी के पद पर तब प्रमोट किया गया जब उन पर महिला पत्रकार द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। वहीं इस गंभीर मामले में अब तक महिला पत्रकार की एफआईआर दिल्ली पुलिस ने दर्ज नहीं की है।

ACP विवेक भगत को महिला पत्रकार के साथ की बदसलूकी के मामले के करीब 24 घंटे बाद ही प्रमोशन दिया गया है। वहीं दिल्ली सरकार द्वारा इस तरह विवेक भगत को प्रमोट किए जाने के बाद काफी ट्रोल किया जा रहा था। प्रमोशन लिस्ट में विवेक भगत का नाम देखने के बाद जनता का सरकार से भरोसा उठता नजर आया। वहीं विरोध और ट्रोलिंग के कुछ घंटे बाद विवेक भगत के प्रमोशन को फिलहाल के लिए टाला गया है। प्रमोशन लिस्ट में विवेक भगत के साथ करीब 12 अधिकारियों का नाम शामिल है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त का वर्तमान कार्यभार पाने वाले 12 अधिकारियों में डॉ. विकास श्योकंद, ए वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, विवेक भगत, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता शामिल हैं। वहीं विवेक भगत के प्रमोशन को टालने को लेकर दिल्ली सरकार ने एक्स पर सफाई दी है। उन्होंने एक पोस्ट शेयर कर कहा है कि विवेक भगत ने खुद अनुरोध किया है कि मामले की जांच होने तक उन्हें अतिरिक्त कार्यभार ना सौंपा जाए।

बता दें ACP Vivek Bhagat पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार से छेड़छाड़ का आरोप है। महिला पत्रकार का कहना है कि जिस समय नेहा बोरा (Neha Bora) को पुलिस डिटेन कर रही थी, ठीक उसी समय महिला पत्रकार उस घटना को कवर कर रही थी। उसी समय विवेक भगत ने महिला पत्रकार के स्तन को पकड़ा और दबाया, इसके बाद उन्होंने महिला पत्रकार को धक्का देते हुए धमकाया। वहीं जब महिला पत्रकार अपने साथ हुई ज्यादती के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने पुलिस स्टेशन पहुंची तो पहले उसे बाहर कई घंटे तक इंतजार करवाया गया। बाद में पुलिस थाने के अंदर करीब साढ़े तीन घंटा बैठाने के बाद उसे ये बोलकर टाल दिया गया कि पहले घटना की जांच होगी, अगर कोई दोषी पाया जाता है तब हम एफआईआर दर्ज करेंगे।
पुलिस के इस रवैये को देख स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस थाने का घेराव किया और विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन विवेक भगत के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन और उग्र हुआ लेकिन दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और विवेक भगत को प्रमोशन सौंप दिया गया।



