Independence Day: आजादी के 80 साल और अभी भी कैद हैं लड़कियां
आज है 15 अगस्त और पूरा देश (Independence Day) आजादी के 80 साल पूरे होने का जोरदार जश्न मना रहा है। कहीं तिरंगा लहराया जा रहा है, तो कहीं भाषण और नाच गाना हो रहा है। लेकिन भारत के इस जश्न में भारत की बेटियां आज भी आजादी के लिए तरस रही हैं।
देश तो आजाद हो गया है और आगे भी बढ़ गया लेकिन लड़कियां पीछे और बहुत पीछे रह गईं। जहां भारत बुलेट ट्रेन की बात करता है वहीं भारत में लोग आज भी लड़कियों के फोन चलाने पर सवाल कर रहे हैं। वो अपने ही पिता की बाइक के पीछे कैसे बैठेंगी ये भी एक सवाल है। लड़कियां क्या पहनेंगी ये भी एक सवाल है।
वैसे इसी विश्वगुरु वाले देश में लड़कियां आज भी पैदा होने से पहले ही मार दी जाती हैं और अगर पैदा हो जाएं तो रेप का शिकार हो जाती है। वैसे इस आजाद देश में रेप की घटनाएं तो अब जैसे आम बात सी हो गई है। महीने भर की बच्ची हो या बूढी दादी, आदमी हर उम्र की औरत से रेप कर रहा है। लेकिन दिन दोगुनी और रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ती जा रही इन रेप की घटनाओं पर ना किसी खाप पंचायत का कोई सवाल है… ना किसी सरकार का…ना किसी विरोधी पार्टी का…
यूं तो देश के महान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को साल 2047 के विकसित भारत का सपना दिखा रखा है लेकिन सवाल ये है कि, आखिर कैसे….? हमने आजतक किसी सरकार के विजन बोर्ड में रेप की घटनाओं के खात्मे की बात आखिर क्यों नहीं सुनी, ये भी तो एक सवाल है।
किसी भी पॉलिटिकल पार्टी ने आजतक क्यों नहीं कहा कि फलाने साल तक हम रेप की घटनाएं रोक देंगे…आखिर क्यों…ये भी एक सवाल है…
सरकार के पास ना सही लेकिन इसका जवाब मेरे और आपके पास है। और ये जवाब है कि किसी भी सरकार को बेटियों की पड़ी ही नहीं है। इसलिए बेटियों पर हो रहे अत्याचार के सौ मुद्दों में से अगर सिर्फ रेप की बात करें तो भी सरकार चुप ही रहेगी।
अब आप कहेंगे कि आखिर इसमें सरकार क्या करे..सरकार ने कानून बनाए तो हैं…
वैसे रेप की घटनाओं की बर्बरता को देखकर अगर लड़कियां, महिलाएं, औरतें कांप जाती हैं तो आखिर रेपिस्ट को मिलने वाली सजा ऐसी क्यों नहीं कि लड़के, पुरुष, आदमियों की भी रूह कांप जाएं, वो सपने में भी ऐसा कुछ करने की हिम्मत ना दिखा पाए। सोचने की बात है कि गाय की मौत पर तमाशा कर देने वाली सरकार आखिर रेप की घटना पर सख्त क्यों नहीं….
