CJP Protest: संसद जा रहे बच्चों पर पुलिस की बर्बरता, फोड़े सिर, तोड़े हाथ
CJP protest: Security forces fire tear gas
CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन ने पूरे देश को एकजुट कर दिया है। जहां देश का युवा पिछले डेढ़ महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था। वहीं जब सोमवार 20 जुलाई को देशभर से पहुंचे युवाओं और समर्थकों ने संसद की ओर कूच करने की कोशिश की तब दिल्ली पुलिस और सुरक्षाबलों की बर्बरता का नजारा भी देखने को मिला। इस दौरान बेहद शांतिपूर्ण और निहत्थे बच्चों पर सुरक्षाबल ने ऐसी लाठी भांजी की बच्चों के सिर फूटे और हाथ टूटे। नजारा ऐसा था कि आपका अच्छा-खासा दिमाग भी हिला कर रख दे।
सीजेपी के ‘चलो संसद’ के आह्वान के तहत देश के हर कोने से दिल्ली पहुंचे युवाओं को भारत सरकार ने ‘शाम-दाम-दंड-भेद’ की नीति के तहत रोकने की पूरी कोशिश की। हालांकि इसकी तैयारी पिछले कुछ दिनों से लगातार देखी गई थी लेकिन असली नजारा सोमवार को तब देखा गया जब बच्चे शांतिपूर्वक संसद की ओर जाना चाह रहे थे और पुलिस द्वारा उन पर बल का लगातार प्रयोग किया जा रहा था।
पुलिस ने निहत्थे बच्चों पर ना सिर्फ लात घूंसे चलाए बल्कि लाठियां भी बरसाई। कई पुलिसकर्मी तो जैसे हाथ पैर धोकर बच्चों के पीछे ही पड़ गए। पुलिसकर्मी लगातार बच्चों पर जबरन लाठीचार्ज करते दिखे। लाठीचार्ज में इतना दम था जिससे मांस तो फटे ही फटे लेकिन हड्डी भी टूट जाए। कई बच्चें खून से लतपथ देखे गए। जब बात लाठी डंडे से नहीं संभली तो बच्चों पर आंसू गैस यानी टियर गैस के गोले दागे गए।
इतना ही नहीं बच्चों का दावा है कि पुलिस ने इस प्रदर्शन को उग्र करार देने के लिए प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरा ट्रक भी तैयार रखा था। इसके साथ ही घटनास्थल पर एक डैमेज्ड कार यानी पहले से ठुकी पिटी कार को भी प्लांट किया। दिल्ली पुलिस जिसे शायद बाद में सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश कर अपने लाठीचार्ज को जस्टिफाई करने की कोशिश करेगी। खैर बात ये है कि ये प्रदर्शन जब शांति से चल रहा था तो इसमें इतनी बर्बरता की जरूरत आखिर क्यों थी। क्या देश में अब खुद जनता अपने द्वारा चुने नेताओं से सवाल नहीं कर सकती है। क्या सरकार यही बताना चाहती है कि जनता उनसे कुछ पूछ नहीं सकती है, जो भी हो बस जनता को चुप-चाप सहना ही होगा। सवाल कई हैं लेकिन जवाब कौन देगा….नेहरू या गांधी….



