CJP का आंदोलन खत्म, जंतर मंतर पर पुलिस ने फिर चलाई टियर गैस
CJP protest ends, police fire tear gas again at Jantar Mantar.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद सीजेपी (CJP) की ओर से आंदोलन को खत्म करने की पुष्टि कर दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस आंदोलन की जीत के साथ इसे यही खत्म करने की बात कही है। इसके बावजूद दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे बच्चे वहां से जा नहीं रहे हैं। बच्चों का कहना है कि सोनम वांगचुक एक बार अपना मैसेज दे दें इसके बाद ही वो जंतर मंतर से जाएंगे। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर युवाओं पर टियर गैस चलाई है। सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें टियर गैस चलने के बाद एक बार फिर युवाओं और पुलिस के बीच झड़प देखी जा रही है।
सरकार द्वारा बच्चों की सभी मांगे मान लेने के बाद सीजेपी और युवाओं में इस जीत का जश्न देखने को मिला। इस्तीफा होने के तुरंत बाद जंतर मंतर पर सीजेपी लीडर अभिजीत दीपके ने स्टेज से युवाओं को संबोधित कर इसकी जानकारी देते हुए जीत की खुशी मनाई थी। बाद में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी तमाम मांगे मान ली गई है इसलिए हम तत्काल प्रभाव से अपना आंदोलन यहीं खत्म करते हैं। उन्होंने जल्द से जल्द जंतर मंतर खाली करने की बात भी कही।
सीजेपी द्वारा आंदोलन खत्म करने के बाद भी युवाओं की बड़ी संख्या जंतर मंतर पर मौजूद है। वहीं स्थिती को काबू करने के लिए पुलिस लगातार कोशिश करने में जुटी है। वहीं बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों को एक बार फिर खोल दिया गया है। लेकिन युवाओं और पुलिस के बीच एक बार फिर संघर्ष देखने को मिल रहा है। युवाओं को काबू करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर टियर गैस चलाई है, जिसके बाद बच्चे पुलिस पर टूट पड़े। इस्तीफे और आंदोलन खत्म होने के बाद भी जंतर मंतर की स्थिती काफी गंभीर बनी हुई है।

NEET पेपर लीक के मामले की वजह से करीब 21 बच्चों ने अपनी जान आत्महत्या कर गंवा दी थी। इसी वजह से कॉकरोच जनता पार्टी ने करीब डेढ़ महीने पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। इसी प्रदर्शन के तहत 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च करने के दौरान दिल्ली पुलिस ने युवाओं पर बर्बरतापूर्ण रवैया अपनाते हुए लाठीचार्ज किया था। इसके बाद से ये प्रदर्शन देशभर में जोर पकड़ चुका था। प्रदर्शन को लगातार बढ़ता देख 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपना इस्तीफा दे दिया।



